आज मैं छेड़ छाड़ का ज़िक्र करूँगा. बहुत पहले व्यंग के जादूगर यशवंत कोठारी जी ने छेड़ छाड़ पर एक व्यंग लिखा था जो काफी मशहूर हुआ.छेड़-छाड़ पर लिखने की प्रेरणा उन्ही के व्यंग से मिली.
छेड़-छाड़ उस विधा का नाम है जिसे बेटा बिना बाप के सिखाये सीख जाता है.मूछों की रेखा आयी नही की बच्चा छेड़-छाड़ शास्त्र में उलझ जाता है.छेड़ने की पर्यायवाची: क्या माल है ,क्या कमर है,क्या चलती है, आती क्या खंडाला आदि .फसलों की किस्मों की तरह छेड़ छाड़ की की भी काफी किस्म होतीं हैं.जैसे बजारू छेड़ छाड़ ,घरेलू छेड़ छाड़ ,दफ्तरी छेड़ छाड़,जीजा साली छेड़ छाड़ ,फिल्मी छेड़ छाड़ ,साहित्यीक छेड़ छाड़ ,ब्लोगिंग छेड़छाड़ वगैरह, वगैरह.
वैसे मुझ खाकशार को छेड़छाड़ पर कोई व्यक्तिगत अनुभव नहीं है.छेड़छाड़ की परम्परा आदिकाल से ही चली आ रही है.आदम ने हब्बा को छेडा परिणाम आज की सृष्टि .सपुर्न्खा ने राम लक्ष्मण को छेडा परिणाम सपुर्न्खा की नाक कटी.रावण ने सीता को छेडा परिणाम ,रावण का नाश हुआ.और आगे बढें तो द्वापर के सबसे बडे छेडैया कृष्ण जी हुए.पनघट पे गोपियों को छेडा और अनंत काल तक छेड़ते रहे परिणाम ये हुआ की गोपियों ने उनकी गैईया को चराने से मना कर दिया.
अब आया कलजुग जिसमे छेड़छाड़ ने काफी विकास किया.महाराणा प्रताप ने अकबर को छेडा,शिवाजी ने औरंगजेब को छेडा.गांधी जी ने अंग्रेजों को छेडा, विकसित देश विकाशील देशों से छेड़ छाड़ कर रहे हैं, पडोसी पडोसी से छेड़छाड़ कर रहा है.राजनितिक दल आपस में छेड़ छाड़ कर रहे हैं.सरकार जनता से छेड़छाड़ करती है,और हाँ, जनता भी पांच वर्षों में एक बार सरकार से ऐसा छेड़छाड़ करती है की सरकार चारो खाने चित्त.हिन्दी चिटठा पुरस्कार कमिटी ने २००७ की पुरस्कृत ब्लागर ममता जी को छेडा परिणाम ये हुआ की ममता जी ने पुरस्कार ही लेने से मना कर दिया .
छेड़छाड़ का प्रसिद्ध मौसम "फागुन " माना जाता है.वैसे मकर संक्रान्ति से सीजन शुरू हो जाता है फिर वसंत पंचमी और होली पर तो छेड़छाड़ एक राष्ट्रीय कार्यक्रम की तरह हो जाता है.फिर आता है मई-जून जिसमे छेड़छाड़ अपने चरम पे होता है.क्युकी ये शादी व्याह का मौसम हो जाता हैं,इसमे खूब छेड़ छाड़ चलती है.
जहाँ तक बात है दफ्तरी छेड़छाड़ की,अगर अप्रैसल के टाईम बॉस छेड़छाड़ कर दे तो एम्प्लोयी बेचारा फिर एक साल तक रोता है.कभी कभी छेड़छाड़ रूपी अस्त्र तबादले के लिए भी किया जाता है. बॉस जब महिला कर्मचारी को छेड़ता है तो क्या बात.बॉस उन्हें अपने केबिन में बुलाता है,काफी पिलाता है,फिर शाम को उन्हें पिक्चर और डिनर के लिए आमंत्रित करता है और कुछ दिनो बाद महिला का प्रमोशन हो जाता हैं.
खैर छेड़छाड़ पर लिखते रहे तो ये अद्ध्याय कभी खत्म नही होगा.हम प्राईवेट नौकरी वाले तो साल भर छेड़छाड़ करते रहते हैं, न करें तो खाएं क्या? कभी कोडिंग से छेड़छाड़ ,कभी अल्गोरिथम से छेड़छाड़ ,कभी एस.डी.एल.सी से छेड़छाड़, कभी प्रोजेक्ट मैनेजर से छेड़छाड़ ,कभी एच.आर . से छेड़छाड़.........कभी खुद से छेड़छाड़!!!
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Friday, February 1, 2008
Sunday, January 27, 2008
विल्स नेविकट और खड-खाना
मेरे मित्र अरुण तिवारी (हम लोग आठ साल से एक साथ रहते हैं) को कल एक शादी के निमंत्रण पर जाना हुआ.रात के ११ बजे वहाँ से फारिग हो कर कमरें पर आयें.देख रहा हूँ उनके हाथ में २ विल्स नेविकट(सिगरेट ) की डिब्बियां .मेरे तो आश्चर्य का ठिकाना न रहा.मैंने पूछा तिवारी यार कोई लौटरी हाथ लगी या सिगरेट की डिब्बियों की बाहर बारिश हो रही थी.क्युकी मैंने हरदम तिवारी जी को १ या २ सिगरेट खरीदते हुए देखा (आठ साल से ).
उन्होने मुश्काराकर कहा “अबे यार !शादी में गया था न !! रोहिणी ,वही से जुगाड़ हुआ .लेकिन यार आते आते मैंने एक और डिब्बी पर हाथ फेरना चाहा पर फिसल गयी.फिर तिवारी जी पुलाव,शाही पनीर,टिक्की मसाला आदि के किस्से सुनाया .बहुत भीड़ हो गयी थी लोग छिना झपटी कर राहे थे.फिर रात के २ बजे तक हम लोग काफी बातचीत किये आज के बफे (खड खाने ) और व्यवस्था पर.
आज देश का बढियां खाना कुत्तों के पेट में जा रहा है.क्यों की बड़ी पार्टियों ,डिनरों, शादी व्याह में खडे खडे खाने का रिवाज़ है.पर आज तक यह समझ में नही आया की इस देश में कुर्सियों की ऐसी कौन सी बड़ी कमी आ गयी जो लोग बाग़ बैठकर खाना नहीं खा सकते.देख कर ऐसा लगता है की जैसे लोग प्लेट लेकर भोजन समेत घर भाग जायेंगे. ऐसे में अगर कान खुजलाना हो या सरकता हुआ चश्मा ठीक करना हो तो समस्या !!! एक हाथ में नेप्किन और प्लेट दूसरे में चमचा .तीसरा हाथ भगवान् ने दीया नहीं.मजबूरन पास गुजरते लोगो से कहना पड़ता है.भाई साहब जरा मेरा कान खुजला दीजिये या चश्मा सरका दीजिये . लोग बाग़ खाली प्लेट ले कर ऐसे इधर उधर टहलते हैं जैसे सूट पहन कर भीख मांगने जा रहे हो.
एक अजीब दृश्य होता है "बफे उर्फ़ खड खाने " का. हर आदमी ओलम्पिक खिलाडी की तरह इस लालच में उछलता है की सीधे पकवान के डोंगे पर जा कर गिरे और अपनी प्लेट में पहाड़ समेत ले.ऐसे मौके पर महिलाओं का कौशल देखने योग्य होता है.पहले अपने निजी उपलब्धियों (बच्चो ) को आगे ठेलती हैं ,फिर उनकी सुरक्षा के बहाने खुद डोंगे पर हावी हो जाती हैं .साथ साथ यह भी दोहराती जाती हैं की उनका कुछ खाने का मूड नही है...खाने की आपाधापी को देख कर ऐसा लगता है की लोग जिंदगी में पहली बार खाना खा रहे हों.खड खाने की लड़ाई में जो लोग विजयी होते हैं उनके प्लेट में लड़ा माल देख कर ऐसा लगता है की ये लोग अब चार पाच दिन तक खाना नही खाएँगे.
फिर कुछ देर बाद लोग खाने पर अपनी राय प्रस्तुत करते हैं.अरे मिश्र जी " शाही पनीर तो लाजवाब थी पर थोडी तीखी हो गयी थी.पूरियां थोडी जल गयी थी.मिश्रा जी आपने गोल गप्पे खाया था ? नही! मिश्र जी आश्चर्य से बोलते हैं .अमा यार ,शाही पनीर के राईट हैण्ड को दस कदम आगे बढ़ने पर मशरूम का डोंगा था ,उससे लेफ्ट को पुलाव के रास्ते हो कर स्ट्रेट जाने पर गोल गप्पे थे. ..............
उन्होने मुश्काराकर कहा “अबे यार !शादी में गया था न !! रोहिणी ,वही से जुगाड़ हुआ .लेकिन यार आते आते मैंने एक और डिब्बी पर हाथ फेरना चाहा पर फिसल गयी.फिर तिवारी जी पुलाव,शाही पनीर,टिक्की मसाला आदि के किस्से सुनाया .बहुत भीड़ हो गयी थी लोग छिना झपटी कर राहे थे.फिर रात के २ बजे तक हम लोग काफी बातचीत किये आज के बफे (खड खाने ) और व्यवस्था पर.
आज देश का बढियां खाना कुत्तों के पेट में जा रहा है.क्यों की बड़ी पार्टियों ,डिनरों, शादी व्याह में खडे खडे खाने का रिवाज़ है.पर आज तक यह समझ में नही आया की इस देश में कुर्सियों की ऐसी कौन सी बड़ी कमी आ गयी जो लोग बाग़ बैठकर खाना नहीं खा सकते.देख कर ऐसा लगता है की जैसे लोग प्लेट लेकर भोजन समेत घर भाग जायेंगे. ऐसे में अगर कान खुजलाना हो या सरकता हुआ चश्मा ठीक करना हो तो समस्या !!! एक हाथ में नेप्किन और प्लेट दूसरे में चमचा .तीसरा हाथ भगवान् ने दीया नहीं.मजबूरन पास गुजरते लोगो से कहना पड़ता है.भाई साहब जरा मेरा कान खुजला दीजिये या चश्मा सरका दीजिये . लोग बाग़ खाली प्लेट ले कर ऐसे इधर उधर टहलते हैं जैसे सूट पहन कर भीख मांगने जा रहे हो.
एक अजीब दृश्य होता है "बफे उर्फ़ खड खाने " का. हर आदमी ओलम्पिक खिलाडी की तरह इस लालच में उछलता है की सीधे पकवान के डोंगे पर जा कर गिरे और अपनी प्लेट में पहाड़ समेत ले.ऐसे मौके पर महिलाओं का कौशल देखने योग्य होता है.पहले अपने निजी उपलब्धियों (बच्चो ) को आगे ठेलती हैं ,फिर उनकी सुरक्षा के बहाने खुद डोंगे पर हावी हो जाती हैं .साथ साथ यह भी दोहराती जाती हैं की उनका कुछ खाने का मूड नही है...खाने की आपाधापी को देख कर ऐसा लगता है की लोग जिंदगी में पहली बार खाना खा रहे हों.खड खाने की लड़ाई में जो लोग विजयी होते हैं उनके प्लेट में लड़ा माल देख कर ऐसा लगता है की ये लोग अब चार पाच दिन तक खाना नही खाएँगे.
फिर कुछ देर बाद लोग खाने पर अपनी राय प्रस्तुत करते हैं.अरे मिश्र जी " शाही पनीर तो लाजवाब थी पर थोडी तीखी हो गयी थी.पूरियां थोडी जल गयी थी.मिश्रा जी आपने गोल गप्पे खाया था ? नही! मिश्र जी आश्चर्य से बोलते हैं .अमा यार ,शाही पनीर के राईट हैण्ड को दस कदम आगे बढ़ने पर मशरूम का डोंगा था ,उससे लेफ्ट को पुलाव के रास्ते हो कर स्ट्रेट जाने पर गोल गप्पे थे. ..............
Saturday, November 17, 2007
लालू ,"हरा पेड़ चर्र्र्र्र्र्र्र्र्रा से गिर गया ,ट्रांसलेशन करो ?"
हमारे मित्र अमित ने कल मुझसे कहा कि ,यार राज ये क्या तुम कविता ,शेर ,दर्द भरा नगमा लिखते रहते हो ,कुछ जोक्स टाइप लिखा करो ,सो मैंने भी सोचा कि क्यों न कुछ ऐसा भी लिखा जाये । तो मुझे एक बहुत पुराना जोक्स याद आ गया ।
एक बार राजू ने एक सपना देखा कि , हमारे देश के तीन नेता ,श्री मनमोहन सिंह,अटल जी ,और लालू जी ,तीनो गुजर गए ,और इनकी आत्मा स्वर्ग में गयी ,तो जैसा कहा जाता है कि ,स्वर्ग में जाने के बाद वह पे चित्रगुप्त हामरे सब कामो हिसाब करते है ,फिर उसके बाद सीट अलोट करते है ,कि किसको स्वर्ग में जाना है ,और किसको नरक में .चित्र गुप्त जी ,अपना रजिस्टर खोलते है,सबसे पहले अटल जी का हिसाब किताब देखते है ।
चित्र गुप्त : अटल ,तुमने तो इंडिया को बहुत फील गूड कराया लेकिन सिर्फ अपनी कविताओं में ,कभी विहिप ,और कभी शिवसेना को कराया ,लेकिन भारत उदय नही हुआ ,खैर कोई बात नही ,तुने जो भी किया कुछ ठीक ही किया ,और अभी तक कुवारे हो ,चलो तुम स्वर्ग में जाओ ,वहा पे परिओं से तुमरा कौमार्य खतम हो जाएगा .जी लेना अपनी ज़िंदगी ।
अब बारी मनमोहन कि
चित्र गुप्त : मनमोहन ,तेरा हिसाब किताब तो बहुत गड़बड़ है .तुमने तो कभी कुछ बोला ही नही ,जो कुछ बोला सोनिया ने ही बोला ,उसने जैसा चाहा वैसा तुमसे कराया ,खैर ,तुम भी स्वर्ग में जाओ ,जी लेना अपनी ज़िंदगी ..अपनी तरह से ।
अब बारी लालू जी कि
चित्र गुप्त : लालू जी ,भाई साहब ,आप नरक में जाओ ,आपका हिसाब किताब बहुत गड़बड़ है ,हमारे रजिस्टर में सब बकाया है आपका ,चारा घोटाला ,गुंडा गर्दी , जेल ,पता नही क्या क्या ।
लालू जी बिफर गए ,गुस्से में बोले , ई का है चित्र गुप्त्वा ,साला धरती पे भी हमारा हिसाब किताब खराब था ,यह पे भी सुकून नही है ,हम नही मानेगे ,हमको भी स्वार्ग में भेजो ,लालोऊ अपनी जिद पे अड़ गए ..फिर चित्र गुप्त ने कहा ,ठीक है ,हम आप लोगो से कुछ प्रश्न पूछूंगा ,जो उत्तर दे देगा ,स्वर्ग में जाएगा ,और जो नही दे पायेगा ,नरक में !सब तैयार हो गए ।
चित्र गुप्त अटल से : अटल Boy माने ।
अटल : जी ,लड़का ।
चित्रग्प्त : Spelling ?
अटल : बी...ओ...वाई
चित्र गुप्त : सबाश !! पास हो गए ,स्वर्ग में जाओ ।
चित्र गुप्त मनमोहन सें : मनमोहन ,girl माने ?
मनमोहन : जी , लड़की
चित्रगुप्त : Spelling?
मनमोहन : G...I...R ..L
चित्र ग्पुत : शाबास !! पास हो गए स्वर्ग में जाओ ।
अब बारी लालू कि
चित्र गुप्त लालू से :
लालू ,CHEKOSLOWAAKIYA माने !!
लालू : ई चित्र गुप्त्वा ,उनसे लड़का लड़की ,हमसे चेकोस्लोवाकिया..ई बिल्कुल भी नही चलेगा ,जयादा मूद्वा खराब करेगा तो हम यह रैल्ली निकाल देंगे ...हम ये पच्छ्पात बिल्कुल भी नही मानेगे ..फिर से पूछो ।
चित्रग्पुत : लालू ,तुमरा ये नाटक नही चलेगा ,चलो तुमको एक चांस और देते है ।
चित्र गुप्त अटल से : अटल ,वह एक लड़का है ,ट्रांसलेशन करो !
अटल : HE IS A Boy !
चित्रगुप्त : शाबास !सबाश !! पास हो गए ,स्वर्ग में जाओ ।
चित्र गुप्त मनमोहन से : मनमोहन ,वह एक लड़की है ,ट्रांसलेशन करो ।
मनमोहन : SHE IS A girl।
चित्रगुप्त : शाबास !सबाश !! पास हो गए ,स्वर्ग में जाओ ।
चित्र गुप्त लालू से : लालू ,हरा पेड़ चर्र्र्र्र्र्र्र्र्रा से गिर गया ,ट्रांसलेशन करो ।
लालू : हे देखा , उनसे लड़का लड़की ,हमसे चर्र्र्रा ,पर्र्र्र्रा !!!बिल्कुल नही ,हमको तो तुम लोग फसा दिए ,जर्रूर ये बीपच्च्ही कि चाल है ,हम नही मानेगे ,एक मौका और चाहिए ,लेकिन इस बार पच्छापात बिल्कुल भी नही ।
चित्र गुप्त : ठीक लालू जी ,एक बार और चांस मिलेगा ,ये लास्ट चांस है ,
चित्र गुप्त अटल से : अटल ,भारत में आजादी कि जंग कि शुरुवात कब हुयी थी ?
अटल : जी ,१८५७ में!
चित्र गुप्त : शाबास !!!! पास हो गए ,स्वर्ग में जाओ !!!
चित्र गुप्त मनमोहन से : मनमोहन , आजादी कि जंग में लगभग कितने लोग शहीद हुए ?
मनमोहन : वही लगभग ,१९ ,२० हजार ।
चित्रगुप्त : शाबास !!!! बिल्कुल सही , पास हो गए... स्वर्ग में जाओ !!!
चित्र गुप्त लालू से :लालू!! तुम उन १९,२० हजार शहीदों के नाम बताओ ?
एक बार राजू ने एक सपना देखा कि , हमारे देश के तीन नेता ,श्री मनमोहन सिंह,अटल जी ,और लालू जी ,तीनो गुजर गए ,और इनकी आत्मा स्वर्ग में गयी ,तो जैसा कहा जाता है कि ,स्वर्ग में जाने के बाद वह पे चित्रगुप्त हामरे सब कामो हिसाब करते है ,फिर उसके बाद सीट अलोट करते है ,कि किसको स्वर्ग में जाना है ,और किसको नरक में .चित्र गुप्त जी ,अपना रजिस्टर खोलते है,सबसे पहले अटल जी का हिसाब किताब देखते है ।
चित्र गुप्त : अटल ,तुमने तो इंडिया को बहुत फील गूड कराया लेकिन सिर्फ अपनी कविताओं में ,कभी विहिप ,और कभी शिवसेना को कराया ,लेकिन भारत उदय नही हुआ ,खैर कोई बात नही ,तुने जो भी किया कुछ ठीक ही किया ,और अभी तक कुवारे हो ,चलो तुम स्वर्ग में जाओ ,वहा पे परिओं से तुमरा कौमार्य खतम हो जाएगा .जी लेना अपनी ज़िंदगी ।
अब बारी मनमोहन कि
चित्र गुप्त : मनमोहन ,तेरा हिसाब किताब तो बहुत गड़बड़ है .तुमने तो कभी कुछ बोला ही नही ,जो कुछ बोला सोनिया ने ही बोला ,उसने जैसा चाहा वैसा तुमसे कराया ,खैर ,तुम भी स्वर्ग में जाओ ,जी लेना अपनी ज़िंदगी ..अपनी तरह से ।
अब बारी लालू जी कि
चित्र गुप्त : लालू जी ,भाई साहब ,आप नरक में जाओ ,आपका हिसाब किताब बहुत गड़बड़ है ,हमारे रजिस्टर में सब बकाया है आपका ,चारा घोटाला ,गुंडा गर्दी , जेल ,पता नही क्या क्या ।
लालू जी बिफर गए ,गुस्से में बोले , ई का है चित्र गुप्त्वा ,साला धरती पे भी हमारा हिसाब किताब खराब था ,यह पे भी सुकून नही है ,हम नही मानेगे ,हमको भी स्वार्ग में भेजो ,लालोऊ अपनी जिद पे अड़ गए ..फिर चित्र गुप्त ने कहा ,ठीक है ,हम आप लोगो से कुछ प्रश्न पूछूंगा ,जो उत्तर दे देगा ,स्वर्ग में जाएगा ,और जो नही दे पायेगा ,नरक में !सब तैयार हो गए ।
चित्र गुप्त अटल से : अटल Boy माने ।
अटल : जी ,लड़का ।
चित्रग्प्त : Spelling ?
अटल : बी...ओ...वाई
चित्र गुप्त : सबाश !! पास हो गए ,स्वर्ग में जाओ ।
चित्र गुप्त मनमोहन सें : मनमोहन ,girl माने ?
मनमोहन : जी , लड़की
चित्रगुप्त : Spelling?
मनमोहन : G...I...R ..L
चित्र ग्पुत : शाबास !! पास हो गए स्वर्ग में जाओ ।
अब बारी लालू कि
चित्र गुप्त लालू से :
लालू ,CHEKOSLOWAAKIYA माने !!
लालू : ई चित्र गुप्त्वा ,उनसे लड़का लड़की ,हमसे चेकोस्लोवाकिया..ई बिल्कुल भी नही चलेगा ,जयादा मूद्वा खराब करेगा तो हम यह रैल्ली निकाल देंगे ...हम ये पच्छ्पात बिल्कुल भी नही मानेगे ..फिर से पूछो ।
चित्रग्पुत : लालू ,तुमरा ये नाटक नही चलेगा ,चलो तुमको एक चांस और देते है ।
चित्र गुप्त अटल से : अटल ,वह एक लड़का है ,ट्रांसलेशन करो !
अटल : HE IS A Boy !
चित्रगुप्त : शाबास !सबाश !! पास हो गए ,स्वर्ग में जाओ ।
चित्र गुप्त मनमोहन से : मनमोहन ,वह एक लड़की है ,ट्रांसलेशन करो ।
मनमोहन : SHE IS A girl।
चित्रगुप्त : शाबास !सबाश !! पास हो गए ,स्वर्ग में जाओ ।
चित्र गुप्त लालू से : लालू ,हरा पेड़ चर्र्र्र्र्र्र्र्र्रा से गिर गया ,ट्रांसलेशन करो ।
लालू : हे देखा , उनसे लड़का लड़की ,हमसे चर्र्र्रा ,पर्र्र्र्रा !!!बिल्कुल नही ,हमको तो तुम लोग फसा दिए ,जर्रूर ये बीपच्च्ही कि चाल है ,हम नही मानेगे ,एक मौका और चाहिए ,लेकिन इस बार पच्छापात बिल्कुल भी नही ।
चित्र गुप्त : ठीक लालू जी ,एक बार और चांस मिलेगा ,ये लास्ट चांस है ,
चित्र गुप्त अटल से : अटल ,भारत में आजादी कि जंग कि शुरुवात कब हुयी थी ?
अटल : जी ,१८५७ में!
चित्र गुप्त : शाबास !!!! पास हो गए ,स्वर्ग में जाओ !!!
चित्र गुप्त मनमोहन से : मनमोहन , आजादी कि जंग में लगभग कितने लोग शहीद हुए ?
मनमोहन : वही लगभग ,१९ ,२० हजार ।
चित्रगुप्त : शाबास !!!! बिल्कुल सही , पास हो गए... स्वर्ग में जाओ !!!
चित्र गुप्त लालू से :लालू!! तुम उन १९,२० हजार शहीदों के नाम बताओ ?
Friday, October 5, 2007
बूझो तो जाने !!!!!
किसी शायर ने कहा है
"किसी मासूम बच्चे के तबस्सुम में उतर जाओ .
तो जानो खुदा ऐसा ही होता है ।
मुझे बच्चे बहुत प्यारे लगते है ,शायद बच्चे सभी को अच्छे लगते है लेकिन कुछ लोग ऐसे होते है जो बच्चों को ऐसे घूरते है जैसे पाकिस्तान हिंदुस्तान को .इसपे भी किसी शायर ने कहा है ।
वो क्या किसी के होंठों को बाटेगा कह -कहे ।
जिसने घर में बच्चो को भी हँसने नही दिया ॥
मैं रास्ते में चलते रहते हुये भी किसी बच्चे का साथ पाता हूँ तो उसके साथ खेलने लगता हूँ ,क्यों ना उनकी मम्मी भी साथ हो ,अब आप को क्या बताऊँ हमारे दोस्त ये भी कहने लगते है ,बच्चे का आड़ ले कर मम्मी को पटा रहा है ...खैर ,ऐसे ही एक बाल मन ,जो हमारे लैंड लॉर्ड का प्यारा सा "गोलू " है ६ वर्ष का ,मेरे से एक पहेली पूछा .मैं तो बहुत परेशान हो गया ,सोचा चलो ये पहेली मैं अपने चिटठा जगत के साथियों से ही पूछूँगा ?हमारे चिटठा जगत के महान् बेताज बादशाहों "समीर जी , महावीर जी , अनूप जी , ज्ञान दत्त जी ,संजीव ,पर्मेंदर ,आलोक जी ,और हमारे ढ़ेर सारे ब्लॉगर भाई ही इसका सालुसन बतायेंगे .तो पहेली ये है ॥
अंधे कि बीवी को लंगडा ले कर भाग गया ,और गूंगे ने देख लिया ,तो बताओ ,गूंगे ने अंधे को कैसे बताया कि उसकी बीवी को लंगडा ले कर भाग गया ।
और हाँ गोलू ने ये भी कहा है कि अंकल अगर आप इसका उत्तर बता दोगे तो आपको एक चोक्लेत मिलेगी .तो ठीक है आप लोग बता दो वो चोक्लेत आपकी होगी , अगर उत्तर बता दिए तो !!!!!!!!!!
"किसी मासूम बच्चे के तबस्सुम में उतर जाओ .
तो जानो खुदा ऐसा ही होता है ।
मुझे बच्चे बहुत प्यारे लगते है ,शायद बच्चे सभी को अच्छे लगते है लेकिन कुछ लोग ऐसे होते है जो बच्चों को ऐसे घूरते है जैसे पाकिस्तान हिंदुस्तान को .इसपे भी किसी शायर ने कहा है ।
वो क्या किसी के होंठों को बाटेगा कह -कहे ।
जिसने घर में बच्चो को भी हँसने नही दिया ॥
मैं रास्ते में चलते रहते हुये भी किसी बच्चे का साथ पाता हूँ तो उसके साथ खेलने लगता हूँ ,क्यों ना उनकी मम्मी भी साथ हो ,अब आप को क्या बताऊँ हमारे दोस्त ये भी कहने लगते है ,बच्चे का आड़ ले कर मम्मी को पटा रहा है ...खैर ,ऐसे ही एक बाल मन ,जो हमारे लैंड लॉर्ड का प्यारा सा "गोलू " है ६ वर्ष का ,मेरे से एक पहेली पूछा .मैं तो बहुत परेशान हो गया ,सोचा चलो ये पहेली मैं अपने चिटठा जगत के साथियों से ही पूछूँगा ?हमारे चिटठा जगत के महान् बेताज बादशाहों "समीर जी , महावीर जी , अनूप जी , ज्ञान दत्त जी ,संजीव ,पर्मेंदर ,आलोक जी ,और हमारे ढ़ेर सारे ब्लॉगर भाई ही इसका सालुसन बतायेंगे .तो पहेली ये है ॥
अंधे कि बीवी को लंगडा ले कर भाग गया ,और गूंगे ने देख लिया ,तो बताओ ,गूंगे ने अंधे को कैसे बताया कि उसकी बीवी को लंगडा ले कर भाग गया ।
और हाँ गोलू ने ये भी कहा है कि अंकल अगर आप इसका उत्तर बता दोगे तो आपको एक चोक्लेत मिलेगी .तो ठीक है आप लोग बता दो वो चोक्लेत आपकी होगी , अगर उत्तर बता दिए तो !!!!!!!!!!
Saturday, September 29, 2007
डोंट डिस्टर्ब मी -सोने दो !
वायु का प्रवाह ,नदी का प्रवाह ,या फिर मन का प्रवाह निरंतर चलता रहता है । सम्पूर्ण संसार ही गतिशील है । ये गतिशीलता ही जीवन है । पर यदि कहीँ द्वंद में संघर्ष या विश्फोठ हो जाये तो ,यह अनिस्त्कारक भी बन सकता है । आज हम तरक्की के ऐसे स्तीमेर पर सवार है जो हमारे नेताओं के स्पीच से भी ज्यादा गतिशील है । पता नही कितने ऐसे दृश्य देख सकते है आप .आप मुझसे अगर व्यक्तिगत राय मांगे तो मुझे संसद का सबसे प्रभावशाली और प्रेरणा दायक दृश्य वह लगता है ,जब मैंने किसी किसी भासन या बहस के दौरान देश के कुछ पुराने प्रधान मंत्री ,मंत्री या सांसदों को उंघते या सोते देखा है ,बहुत हो हल्ला होने के बाद ही उनकी समाधि टूट ती है । बुरा हो व्यंग चित्रकारों का ,खुदा कि मार पडे कवियों और शायरों पर जो ऐसे महान नेताओं कि नींद मे खलल डालते है । सोते को जगाना क्या ठीक बात है ???? हम हज़ार साल से सोते आ रहे है ,बाहरी मुल्क के लुटेरे आये तो हम सोते रहे या घरों मे दुबक गए उन्होने हम पर राज़ किया और हम मस्त सोते रहे ,पता नही गांधी जी क्या चुन्न्ना लगा ,उसने अपनी लाकुठी से टाहोका देकर नींद तोड़ दिया । जब भारतीयों को अपनी नींद टूटने का एहसास हुआ तो गाधी जी पर ग़ुस्सा उतारा । अभी हम नींद मे ही थे कि ,अंग्रेज आ गए और अपने पुरखों कि मजारों मे नाच गाना कर के ,हमे उनकी वीरता के किस्से सुना गए और हम नींद मे ही बुद बुदाते रहे "अतिथि देवो भवः "
हम ही नही ,हमारे देवी देवता का भी मिजाज़ कुछ मिल जुला है ,जब भी असुरों का आक्रमण होता था ,तो देवता भागकर गुफा पहाडों में छिपते नजर आते थे , कहा जाता है कि भगवान् विष्णू ४ महिने तक सोते ही रहते है ,बुरा हो शेषनाग का जो उसकी गर्दन दर्द करने लगती थी और थोडा सा सिर हिला देने पर भगवान् कि नींद टूट जाती है और धरती पर भूकंप ,आंधी ,सुनामी जैसी आपदा आन् पड़ती है । रावण क्यों हारा ,कुम्भकरण जो बेचारा मस्त सो रह था ,उसके ऊपर हाथी घोड़े और नगाड़ा बाजवा के उठा दिया ,क्या हुआ ,आख़िर रावण का नाश ही हुआ ना !!!
यह बात तो साफ है कि जब आदमी सोया रहता है ,दूसरों का बुरा नही करता ,किसी को तकलीफ नही पहूँचाता ,नेता लोग हमारे असली पाथ प्रदर्शक है ,जो संसद के सभागार में निद्रा में पडे-२ देश के विकास का सपना देखते है । भई !!आख़िर ,जो सपने देखता है वही सपने दिखा भी सकता है .बस सपने देख के ही तो विजन २० पुरा होगा ना ,सपने से ही तो हम तरक्की करेंगे ।
हम ही नही ,हमारे देवी देवता का भी मिजाज़ कुछ मिल जुला है ,जब भी असुरों का आक्रमण होता था ,तो देवता भागकर गुफा पहाडों में छिपते नजर आते थे , कहा जाता है कि भगवान् विष्णू ४ महिने तक सोते ही रहते है ,बुरा हो शेषनाग का जो उसकी गर्दन दर्द करने लगती थी और थोडा सा सिर हिला देने पर भगवान् कि नींद टूट जाती है और धरती पर भूकंप ,आंधी ,सुनामी जैसी आपदा आन् पड़ती है । रावण क्यों हारा ,कुम्भकरण जो बेचारा मस्त सो रह था ,उसके ऊपर हाथी घोड़े और नगाड़ा बाजवा के उठा दिया ,क्या हुआ ,आख़िर रावण का नाश ही हुआ ना !!!
यह बात तो साफ है कि जब आदमी सोया रहता है ,दूसरों का बुरा नही करता ,किसी को तकलीफ नही पहूँचाता ,नेता लोग हमारे असली पाथ प्रदर्शक है ,जो संसद के सभागार में निद्रा में पडे-२ देश के विकास का सपना देखते है । भई !!आख़िर ,जो सपने देखता है वही सपने दिखा भी सकता है .बस सपने देख के ही तो विजन २० पुरा होगा ना ,सपने से ही तो हम तरक्की करेंगे ।
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