Saturday, September 29, 2007

डोंट डिस्टर्ब मी -सोने दो !

वायु का प्रवाह ,नदी का प्रवाह ,या फिर मन का प्रवाह निरंतर चलता रहता है । सम्पूर्ण संसार ही गतिशील है । ये गतिशीलता ही जीवन है । पर यदि कहीँ द्वंद में संघर्ष या विश्फोठ हो जाये तो ,यह अनिस्त्कारक भी बन सकता है । आज हम तरक्की के ऐसे स्तीमेर पर सवार है जो हमारे नेताओं के स्पीच से भी ज्यादा गतिशील है । पता नही कितने ऐसे दृश्य देख सकते है आप .आप मुझसे अगर व्यक्तिगत राय मांगे तो मुझे संसद का सबसे प्रभावशाली और प्रेरणा दायक दृश्य वह लगता है ,जब मैंने किसी किसी भासन या बहस के दौरान देश के कुछ पुराने प्रधान मंत्री ,मंत्री या सांसदों को उंघते या सोते देखा है ,बहुत हो हल्ला होने के बाद ही उनकी समाधि टूट ती है । बुरा हो व्यंग चित्रकारों का ,खुदा कि मार पडे कवियों और शायरों पर जो ऐसे महान नेताओं कि नींद मे खलल डालते है । सोते को जगाना क्या ठीक बात है ???? हम हज़ार साल से सोते आ रहे है ,बाहरी मुल्क के लुटेरे आये तो हम सोते रहे या घरों मे दुबक गए उन्होने हम पर राज़ किया और हम मस्त सोते रहे ,पता नही गांधी जी क्या चुन्न्ना लगा ,उसने अपनी लाकुठी से टाहोका देकर नींद तोड़ दिया । जब भारतीयों को अपनी नींद टूटने का एहसास हुआ तो गाधी जी पर ग़ुस्सा उतारा । अभी हम नींद मे ही थे कि ,अंग्रेज आ गए और अपने पुरखों कि मजारों मे नाच गाना कर के ,हमे उनकी वीरता के किस्से सुना गए और हम नींद मे ही बुद बुदाते रहे "अतिथि देवो भवः "
हम ही नही ,हमारे देवी देवता का भी मिजाज़ कुछ मिल जुला है ,जब भी असुरों का आक्रमण होता था ,तो देवता भागकर गुफा पहाडों में छिपते नजर आते थे , कहा जाता है कि भगवान् विष्णू ४ महिने तक सोते ही रहते है ,बुरा हो शेषनाग का जो उसकी गर्दन दर्द करने लगती थी और थोडा सा सिर हिला देने पर भगवान् कि नींद टूट जाती है और धरती पर भूकंप ,आंधी ,सुनामी जैसी आपदा आन् पड़ती है । रावण क्यों हारा ,कुम्भकरण जो बेचारा मस्त सो रह था ,उसके ऊपर हाथी घोड़े और नगाड़ा बाजवा के उठा दिया ,क्या हुआ ,आख़िर रावण का नाश ही हुआ ना !!!
यह बात तो साफ है कि जब आदमी सोया रहता है ,दूसरों का बुरा नही करता ,किसी को तकलीफ नही पहूँचाता ,नेता लोग हमारे असली पाथ प्रदर्शक है ,जो संसद के सभागार में निद्रा में पडे-२ देश के विकास का सपना देखते है । भई !!आख़िर ,जो सपने देखता है वही सपने दिखा भी सकता है .बस सपने देख के ही तो विजन २० पुरा होगा ना ,सपने से ही तो हम तरक्की करेंगे ।

6 comments:

Gyandutt Pandey said...

बहुत सही. ठाठ से सोओ मित्रों. सपने देखो कि देश तरक्की कर रहा है. शायद कर ही ले! :-)

महावीर said...

सोने वालों की नींद में खलल डालने के लिए ज़बरदस्त व्यंग्य है। बहुत अच्छा लगा।

Anonymous said...

सोये गा सो खोयेगा जगेगा सो पायेगा
जागो इंडिया जागो और अपने देश को उसकी मंजिल तक पहुचाओ
Best of Luck all Indians
Thanks....
Shashi Bhushan

Lipitor said...

It is really good to see dreams but to fullfill them is in our own hands. You should not blame others if your dreams does not come true.
The truth of life is that each and every person does not get what they want but yes they can dream of it and makle there goals to achieve them.
So keep dreaming while sleeping and set new goals and tragets everyday and acheive them.

रवीन्द्र प्रभात said...

ऐसी ही रचनाएँ श्रेष्ठता की परीधि में शुमार होती है,बहुत खूब्॥धन्यवाद

दीपक श्रीवास्तव said...

कभी हम लोगो से भी बात कर लिया करो फिर सोवो जितना मन करे