Thursday, September 20, 2007

कालिया और लूट -मार सोफ्टवेयर

गब्बर कालिया और दो साथियों को रामगढ लूट -मार सोफ्टवेयर लाने के लिए भेजता है .

वो रामगढ़ पहूचते है ,और चिल्लाते है : "अबे ओ ! ठाकुर ! कहां है वो लूट -मार सोफ्टवेयर? लास्ट डेट तो कब का निकल गया ".

ठाकुर [ग़ुस्से में ]: "चिल्लाओ मत ! जाकर गब्बर से कह दो कि ठाकुर सोफ्टवेयर वालों ने पागल कुत्तों के लिए सोफ्टवेयर बनाना बंद कर दिया है ।"

कालिया : "बहूत गरमी दिखा रहे हो ठाकुर ? कोई नए प्रोग्रामर हायर किये हैं क्या ?"

ठाकुर : "नज़र उठा के देख , कालिया , तेरे सर पर मेरे दो प्रोग्रामर कोडिंग कर रहे है ।"


कालिया ऊपर देखता है जय और वीरू को जो अलग अलग वाटर टैंक पेर लैपटोप ले कर बैठे है ।


Kaalia (हसते हुये ): "हां हां हां हां हां हां ... ठाकुर ने फ्रेशार (freshers) को हायर किया है ये लोग प्रोग्रामिंग करेंगे ?? इन को तो DOS कमांड्स भी ! नहीं आती ।"

वीरू(चिल्लाता है ): "चुप -चाप चला जा कुत्ते . हम लोग कोन्सुल्तैंत (consultant) हैं , कुछ भी कर सकते हैं ।"........। . और हम गूगल से कोड चुरा के कुछ भी कर सकते है .

जय कंप्यूटर पे कुछ टाईप कर्ता है ,और कहता है : "जाओ कालिया , गब्बर से कहना कि उसका सर्वर डाउन हो गया."

गब्बर के पास :

गब्बर : "कितने वायरस थे रे कालिया ?"

कालिया : "दो सरकार ."

गब्बर : "वो दो ! और तुम तीन एंटी - वायरस. फिर भी फिक्स नही कर सके ? क्या सोच के आये हो ? गब्बर बहूत खुश होगा ? इन्सेंतीव देगा , सेलरी बडायेगा ?

इसकी सज़ा मिलेगी ... बरोबर मिलेगी . (गब्बर चिल्लाता है ) "शाम्भा लैपटोप ला रे ".

"कितने सेस्सिओंस (session) हैं इस मशीन में ?"

शम्बा : "छे सरकार ."

गब्बर : "session ६ और प्रोग्रामर ३ . बहूत नाइंसाफी है .[लाग आउट - लाग आउट - लाग आउट ]. हाँ अब ठीक है ... अब तेरा क्या होगा कालिया ?"

कालिया : "सरकार , मैंने आपका कोड लिखा था ।"

गब्बर : "तो ले अब टेस्टिंग कर !" ...हां हां हां आहा हः आःहाहा हह्हा हां ।


6 comments:

जीतेन्दर सिंह said...

अरे वो शाम्भा !! कैसी पोस्ट है रे ये।
अच्छी है सरदार ।
शाबास !!! ले अब तू भी पढ़ ।
सरदार मुझे पढना नही आता ।
तो ठीक है कल ठाकुर के पास जान शुरू कर दे....
अच्छा लिखा है आपने ...मजा आ गया ...

Juneli said...

Wow!

"Vicharon Ki ZameeN" Lovely title and the description with the Rabindranath Taigore. I'm speechless....

Hope

Veecharon ki zameen pe
pyare ke meethe gul khilenge
milte raho zindagi se yon hi
zindagi ke hi phool khilenge

Thanks a lot for visiting my page and leaving your link. I's here follwoing your foot step.

Hope you will be regular there.

BTW, I have posted a ghazal yesterday. Hope you will give some suggestions on that :).

रवीन्द्र प्रभात said...

आपके प्रयास सराहनीय है और में अपने ब्लॉग पर आपका ब्लॉग लिंक कर दिया है।

Juneli said...

he he he he

अनूप शुक्ला said...

वाह हम खुश हो गये।

Ashok Kumar said...

Rajkumar you have done nice work on Gabbar singh and his party.

Ashok Kumar