Saturday, July 3, 2010

ख़्वाब इन आँखों से अब कोई चुरा कर ले जाये / बशीर बद्र

ख़्वाब इस आँखों से अब कोई चुरा कर ले जाये
क़ब्र के सूखे हुये फूल उठा कर ले जाये

मुंतज़िर फूल में ख़ुश्बू की तरह हूँ कब से
कोई झोंकें की तरह आये उड़ा कर ले जाये

ये भी पानी है मगर आँखों का ऐसा पानी
जो हथेली पे रची मेहंदी उड़ा कर ले जाये

मैं मोहब्बत से महकता हुआ ख़त हूँ मुझ को
ज़िन्दगी अपनी किताबों में दबा कर ले जाये

ख़ाक इंसाफ़ है नाबीना बुतों के आगे
रात थाली में चिराग़ों को सजा कर ले जाये

6 comments:

Etips-Blog Team said...

कोई बेवफाई न करे मुझसे ,देर आये दुरुस्त आये चुरा कर ले जाऐ


मजा आ गया आपकी पोस्ट से ।

Comments by: इटिप्स ब्लाग से Mukesh yadav

प्रवीण पाण्डेय said...

बशीर बद्र साहब की रचनाओं में गहराई है जो जानी पहचानी सी लगती है ।

sunnymca said...

मैं मोहब्बत से महकता हुआ ख़त हूँ मुझ को
ज़िन्दगी अपनी किताबों में दबा कर ले जाये..

bahut khubsurat likha hai.

Love Shayari said...

नमश्कार यादव जी! मैं पिछले आधे घंटे से आपकी विभिन्न कविताएँ पढ़ रही हूँ और काफ़ी प्रभावित हुई हूँ| आपकी कविताओं में कुछ तो है जो दिल को छू जाता हैं| आप बस ऐसे ही लिखते रहे|

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