Sunday, July 27, 2008

तुम्हें भूलने की मैं कोशिश करूँगा

चमन की बहारों में था आशियाना
न जाने कहाँ खो गया वो ज़माना

तुम्हें भूलने की मैं कोशिश करूँगा
ये वादा करो के न तुम याद आना

मुझे मेरे मिटने का गम है तो ये है
तुम्हें बेवफा कह रहा है ज़माना

खुदारा मेरी कब्र पे तुम न आना
तुम्हें देख कर शक करेगा ज़माना

5 comments:

nadeem said...

खुदारा मेरी कब्र पे तुम न आना
तुम्हें देख कर शक करेगा ज़माना

WAH!!!

Anwar Qureshi said...

बहुत अच्छा लिखा है आप ने ..धन्यवाद ..

Gyandutt Pandey said...

तुम्हें देख कर शक करेगा ज़माना

वाह, कब्र पर भी शक मरता नहीं।

Kavi Kulwant said...

Good writing...congrats...
kavi kulwant singh
http://kavikulwant.blogspot.com

Kapil Kant Pathak said...

Wah!!!!!!!!

Alfaz he naheen tarif karne ko...