Saturday, March 1, 2008

प्रतीक्षारत हूँ !!!!!!


सरिताओं का गहरा सागर उमड़ा था .

जब देखा था तुमने .

चाहत भरी निगाहों से मुझे!

चाहता था डूब जाऊं उनमे ,

पर, नही पा सका तुम्हारा वह अस्तित्व

फिर भी "प्रतीक्षारत " हूँ ,

इसीलिए आज तक !

की कभी तो मिलोगी तुम

ख्वाब में या ख़यालों में ,

एक अ-स्पस्ट सी परछाई बनकर!!!

4 comments:

Sanjeet Tripathi said...

आएगी आएगी बल्कि आती ही होगी इसे पढ़ने के बाद तो ;)

Mired Mirage said...

बहुत सुन्दर !
घुघूती बासूती

Anonymous said...
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Anonymous said...

Bahut accha