Tuesday, August 28, 2007

ना Chemistry होती ना मैं Student होता..

ना Chemistry होती ना मैं Student होता ,
ना ये लैब होती ना ये Accident होता .

अभी Practical में आई नज़र एक लडकी ,
सुन्दर थी नाक उस की टेस्ट Tube जैसी .

बातों में उस की Glucose की Mithaas थी ,
सांसों में Ester की खुशबू भी साथ थी .

आंखों से झलकता था कुछ इस तरह का प्यार ,
बीन पीये ही हो जाता है अल्कोहोल का खुमार .

Benzene सा होता था उसकी Presence का एहसास ,
अँधेरे में होता था Radium का आभास .

नज़रें मीलीं , reaction हुआ
कुछ इस तरह love का Production हुआ .

लगने लगे उस के घर के चक्कर ऐसे ,
Nucleus के चारों तरफ Electron hon jaise.

उस दिन हमारे टेस्ट का Confirmation हुआ ,
जब उस के daddy से हमारा Introduction हुआ .

सुन कर hamari बात वो ऐसे उछल पडे ,
Ignesium Tube में जैसे Sodium भड़क उठे .

वो बोले , होश में आओ , पहचानो अपनी औकात ,
Iron मिल नहीं सकता कभी गोल्ड के साथ .

ये सुन कर टुटा हमारे अरमानों भरा बीकर ,
और हम चुप रहे Benzaldehyde का कड़वा घूँट पीकर .

4 comments:

उन्मुक्त said...

अरे वाह, प्रेम भी तो एक तरह की chemistry है। स्वागत है हिन्दी चिट्ठा जगत में।

Gyandutt Pandey said...

"सुन कर hamari बात वो ऐसे उछल पडे ,
Ignesium Tube में जैसे Sodium भड़क उठे ."


बहुत जमाने बाद यह मस्त भाषा सुनने/पढ़ने को मिली. पैतीस-छ्त्तीस साल बाद!

राज यादव said...

सादर धन्यवाद उन्मुक्त और पांडे जी

Reetesh Gupta said...

बढ़िया ...बहुत सुंदर ...मजा आ गया

ऎसे ही लिखते रहें ...बधाई